मानव जीनोम प्रोजेक्ट क्या है || What is human Genome project in Hindi

मानव जीनोम प्रोजेक्ट क्या है – मानव जीनोम प्रोजेक्ट वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही आधुनिक शोध का ही एक उदाहरण है। आज के बदलते दौर में वैज्ञानिकों द्वारा तरह -तरह के शोध किये जा रहे है जिनमे ज्यादातर शोधों में हमारे वैज्ञानिकों से सफलता भी प्राप्त की है। कुछ शोध तो ऐसे है जो हम आम जनों को सोचने पर मजबूर करते है उन्ही शोधों में से एक है मानव जीनोम प्रोजेक्ट क्या है। मानव जीनोम प्रोजेक्ट के बारे में जानने से पहले हमे जीनोम के बारे में जानना आवश्यक है।

जीनोम क्या है – किसी प्राणी अथवा उसके कोशिका में उपस्थित सभी गुणसूत्रों के डीएनए में न्यूक्लियोटाइड क्रम के रूप में संगृहीत जैविक सूचनाओं को ही जीनोम कहा जाता है। दूसरे शब्दों में समझे तो किसी भी जीव के प्रत्येक कोशिका में पाये जाने वाले जीन्स के सम्मिलित रूप को जीनोम कहते है। अभी आपने जाना जीनोम क्या है अब आप जानेगे मानव जीनोम प्रोजेक्ट क्या है।

मानव जीनोम प्रोजेक्ट क्या है ? /What is human Genome project

मनुष्यों के कोशिकाओं में उपस्थित समस्त 46 क्रोमोसोंस के सम्पूर्ण डीएनए {DNA } का पता लगाने हेतु व विभिन्न प्रकार की अनुवांशिक बीमारियों के उपचार हेतु अंतर्राष्टीय स्तर के वैज्ञानिकों ने सन 1990 में एक परियोजना का प्रयोजन किया। मानव जीनोम प्रोजेक्ट या HPG का नाम दिया गया। यह परियोजना अप्रैल 2003 में पूर्ण हुई। मानव जीनोम प्रोजेक्ट एक बहुत बड़ी परियोजना है जो मानवीय हितों को ध्यान के रखकर तैयार की गयी है। इस परियोजना के आयोजन में लगभग 9 बिलियन US – dollar का खर्चा आया है जो एक बहुत बड़ी लागत है।

मानव जीनोम प्रोजेक्ट का इतिहास /History of Human Genome Project 

जीन सरंचनाओं को जानने के लिए अमेरिकी सरकार ने सन 1990 में मानव जीनोम प्रोजेक्ट की शुरुआत की। सन 1993 में अमेरिका में राष्ट्रीय मानव जीनोम अनुसंधान संस्थान (National Genome Research Institute : NGRHI ) की स्थापना की। 26 जून सन 2000  को मानव जीनोम प्रोजेक्ट के अध्यक्ष डॉ. फ्रांसिस कॉलिन्स और सेलेरा जीनोमिक्स के.जे. क्रेग वेंटर ने संयुक्त रूप से मानव जीनोम की संरचना का मॉडल प्रस्तुत किया। लगातार कार्य करने के बाद वैज्ञानिकों ने इस को परियोजना अप्रैल 2003 में पूर्ण घोषित किया।

मानव जीनोम प्रोजेक्ट के उददेश्य /Purpose of Human Genome Project 

मानव जीनोम प्रोजेक्ट एक बड़ी परियोजना थी जिसको पूर्ण करने में पूरे 13 साल का समय व लगभग 9 बिलियन US – dollar का खर्चा आया। यह सब देखते हुए हम कह सकते है की सम्भवतः इसके उद्देश्य मानव हितकारी होंगे तो आइये जानते है मानव जीनोम प्रोजेक्ट के उद्देश्यों के बारे में –

  • मानव जीनोम परियोजना का उद्देश्य मानवीय जीनों का विस्तार से अध्ययन करना।
  •  मानव शरीर में पाए जाने वाले सभी जीनों के बारे में जानकारी प्राप्त करना।
  • प्राप्त जानकारी को आकड़े के रूप में संगृहीत करना।
  • सभी मानव के शरीर में उपस्थित डीएनए के निर्माण में लगे नाइट्रोजन क्षार युग्म के अनुक्रमणो के बारे में जानकारी प्राप्त करना।
  • मानव जीनोम अद्वितीय है मानव के गुणसूत्रों के लिए एक पूर्ण अनुक्रम को प्राप्त कर एक संयोजन शामिल करना।

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मानव जीनोम प्रोजेक्ट की कार्यविधि /process of Human Genome Project 

मानव जीनोम प्रोजेक्ट क्या है। अब इस बात से आप अंजान नहीं रहे पर अब भी सवाल यह यह की मानव जीनोम प्रोजेक्ट की कार्यविधि क्या है। तो आइये जानते है मानव जीनोम प्रोजेक्ट की कार्यविधि के बारे में विस्तार से –

आज के समय में हर कोई निरोगी और पूर्ण रूप से स्वास्थ्य बच्चा चाहता है मानव जीनोम प्रोजेक्ट एक ऐसी कार्यविधि है जिसमे एक मोडिफाइड बच्चे के संकल्पना की जा सकती है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से मनुष्यों के जीन में बदलाव करके उनके रोगों को जड़ से ठीक किया जा सकता है अतः हम कह सकते है की मानव जीनोम प्रोजेक्ट हमारे लिए कई तरह से लाभकारी है।

मानव जीनोम प्रोजेक्ट के लाभ / Advantage of Human Genome Project 

. इस प्रोजेक्ट की सहायता से लम्बे समय तक चलने वाली बिमारियों का पता लगाकर जड़ से ठीक किया जा सकता है।

. मानव जीनोम प्रोजेक्ट के सहायता से अनुवांशिक बिमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

इस प्रोजेक्ट से हम वृद्धावस्था लाने वाले जीनों के बारे में जानेगे जिससे बुढ़ापा आने से रोका जा सकता है।

. इस प्रोजेक्ट की सहायता से मानव की प्रारंभिक अवस्था का पता चला। इससे यह भी पता चला की मानव की उतपत्ति सर्वप्रथम अफ्रीका महाद्वीप पर हुई थी।

. मानव जीनोम प्रोजेक्ट के सहायता से यह पता चला की हमारे वंशज चिम्पैजी थे।

. मानव जीनोम प्रोजेक्ट से मनुष्यों में रंगभेद जैसी समस्या का हल मिल गया।

मानव जिनोम प्रोजेक्ट में भारत की भागीदारी /Contribution of Human Genome Project 

जब इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई तब भारत इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं था हालकि अमेरिका ,चीन ,फ्रांस ,जापान हुए जर्मनी जैसे विकसित देश इसका हिस्सा थे। किन्तु भारत के वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट में कार्यरत थे परिणामतः काफी निष्कर्ष के बाद सन 2016 में शुरू हुए मानव जीनोम प्रोजेक्ट राइट के कार्यक्रम अभियान में भारत भी सहयोग कर रहा है। अतः भविष्य में प्राप्त मानव जीनोम प्रोजेक्ट से होने वाले लाभ का फायदा भारत भी उठा सकेगा। भारत से इस प्रोजेक्ट में खूब दिलचस्पी दिखाई और बढ़ -चढ़कर हिस्सा भी लिया।

भारत को इस प्रोजेक्ट से क्यां लाभ होंगे –

मानव जीनोम की सहायता से भारत में होने वाले खतरनाक रोगो जैसे – डेंगू ,मलेरियाऔर चिकनगुनिया को जड़ से खत्म किया जा सकता है इससे भारत में एक स्वस्थ्य समाज की कल्पना की जा सकती है क्योकि प्रत्येक वर्ष हजारों लोह सिर्फ डेंगू और मलेरिया के कारण अपनी जाने गवा देते है। हम जानते है की मलेरिया ,डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां मच्छरों से फैलती है अतः ऐसे में मलेरिया या डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के जीन में बदलाव कर इन्हे बाँझ बनाकर अपने जंगली साथियों के साथ छोड़ दिए जाए जिससे ये अपनी प्रजाति को बढ़ाने में असमर्थ रहेंगे और धीरे -धीरे मच्छरों का खात्मा हो जायेगा।

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मानव जीनोम प्रोजेक्ट की चिंताए और नैतिक मुद्दे 

इस प्रोजेक्ट से अभी भी मानव वर्ग के आधे हिस्से में आशंकाए है जो लोगों को सोचने में मजबूर करती है हालांकि किसी भी नई पद्धति को अपनाने से पहले ऐसा होना आवश्यक भी है कुछ लोगों का सोचना है की मोडिफाइड जीव या मनुष्य एक नई पद्धति होगी जो हमारी प्राचीन पद्धति के लिए खतरा भी हो सकती है जैसे हम किसी मच्छर को बाँझ बना दे जिससे वह अपनी प्रजाति को न बड़ा सके। तो क्या यह आवश्यक है की यह मोडिफाइड मच्छर अन्य जीवों  ठीक है बल्कि यह मच्छर वातावरण में असंतुलन भी पैदा क्र सकता है या अन्य जीवों का सफाया भी कर सकता है इसी प्रकार यदि हम मनुष्यों में सोचे तो जीन स्थानांतरण के बाद के मनुष्य जरूरी नहीं की स्वस्थ्य ही हो ये हमारे पर्यावरण के किये खतरा भी हो सकते है अतः इस प्रोजेक्ट में अभी और शोध कि आवश्यकता है जो अभी निरंतर किया जाना चाहिए।

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