क्लोनिंग क्या है || जाने क्लोन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी 

आपमें से बहुत से लोगों को नहीं पता होगा की क्लोनिंग क्या है शायद आपके लिए क्लोनिंग क्या है एक नया शब्द हो सकता है पर यह लेख पढ़ने के बाद क्लोनिंग क्या है आपके लिए नया नहीं रहेगा इस लेख के माध्यम से हम आपको क्लोनिंग के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

क्लोनिंग क्या है ? What is Cloning ?

क्लोनिग का तात्पर्य होता है किसी भी जंतु का हमशक्ल या प्रतिरूप  तैयार करना।अर्थात अलैंगिक विधि से एक जीव से दूसरा जीव तैयार करना। क्लोनिंग क्या है तो आप जान चुके है किन्तु अभी भी इसके बारे में आपके कई सवाल होंगे जैसे यह क्लोनिंग कौन करता है ,क्लोनिग कैसे की जाती है आदि आगे के लेख में आप इन सबके बारे में भी विस्तार से पढ़ेंगे।

क्लोनिंग कैसे की जाती है ? Process of Cloning 

ऊपर आपने जाना क्लोनिंग क्या है अब आप जानेगे क्लोनिंग कैसे की जाती है –

हमारा शरीर छोटी -छोटी जीवित व सूक्ष्म कोशिकाओं का बना है ये कोशिकाएं वही करती है जो डीएनए उन्हें करने को कहता है। डीएनए प्रत्येक मनुष्यों का अनुवांशिक कोड होता है जो आधा माँ और आधा पिता के डीएनए से मिलता है। क्लोनिंग प्रक्रिया को अंजाम देते केवल एक अंडाणु की ही जरूरत होती है। वैज्ञानिक किसी भी एक पशु की कोशिका से डीएनए निकालते है और इसे अंडाणु में डाल देते है यह अंडाणु किसी अन्य जानवर से लिया जाता है डीएनए प्रत्यारोपित करने से पहले अंडाणु से न्यूक्लियस या डीएनए को एक सुई की मदद से निकाल दिया जाता है। निषेचन क्रिया प्रारंम्भ करने के लिए इन पर विद्दुत तरंगे प्रवाहित करायी जाती है जिससे कोशिका विभाजन शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया के बाद पूर्ण विकसित अंडाणु को मादा के गर्भ में आरोपित कराकर समरूप क्लोन्स प्राप्त करते है।

क्लोनिंग के प्रकार Types of Cloning 

अभी तक किये गए शोध के अनुसार क्लोनिंग के तीन प्रकार सामने आये है जो इस प्रकार है।

1 . जीन क्लोनिंग या आण्विक क्लोनिंग ( Gene cloning or Molecular cloning )

इसके अंतर्गत जीन अभियांत्रिकी का प्रयोग कर ट्रांसजेनिक सूक्ष्म जीवों जैसे – ट्रांसजेनिक वैक्टीरिया आदि का निर्माण किया जाता है। फिर अनुकूल वातावरण में जेनेटिकली मॉडिफाइड वैक्टीरिया के क्लोन प्राप्त किये जाते है जिनका उपयोग अनेकों उपयोगी कार्यों व मानवीय बिमारियों को ठीक करने में किया जाता है।

2 . प्रजनन क्लोनिंग ( Reproductive cloning )

इस तकनीक में अलैंगिंक विधि द्वारा किसी भी जीव का क्लोन या हमशक्ल तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर SCNT तकनीक का प्रयोग किया जाता है। प्रजनन क्लोनिंग से तैयार क्लोन शारीरिक और अनुवांशिक रूप से अपने जनक के समान ही होता है इसके तहत नाभकीय अंतरण विधि का प्रयोग किया जाता है।

3 . थेराप्यूटिक क्लोनिंग (Therapeutic cloning )

इस प्रक्रिया में खराब और विकारयुक्त ऊतकों या अंगों को स्थानांतरित या सुधार करने हेतु भ्रूणीय स्तम्भ कोशिकाओं का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए किसी युग्मित नाभिक को शरीर की एक कोशिका से नाभित रहित अंडाणु प्रत्यारोपित किया जाता है इस तकनीक से मानव अनुंसधान हेतु भ्रूण तैयार किया जाता है।

क्लोनिंग का इतिहास History of Cloning 

इतिहास में पहली बार क्लोनिंग 1952 में एक मेढ़क का किया गया लेकिन यह ज्यादा चर्चित नहीं रहा। परन्तु इस पर शोध चलता रहा पुनः सन 1996 में डॉ. इयान विल्मुट और उनके सहयोगियों ने सोमैटिक सेल ट्रांसफर टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके ‘डॉली ‘नामक भेड़ का क्लोन तैयार किया। जिसे इन्होने सन 1997 में सार्वजानिक किया। लेकिन ‘डॉली ‘में एक अनुवांशिक बिमारी थी जो उसके क्लोन में भी स्थानांतरित हो गयी जिस कारण डॉली की मृत्यु हो गयी।

भारत में पहली बार सन 2009 में एक भैंस का क्लोन तैयार किया गया जो किसी गड़बड़ी के कारण ज्यादा दिन जीवित नहीं रह पायी। परन्तु इस पर शोध निरन्तर चलता रहा और पुनः एक अन्य भैंस का क्लोन तैयार किया गया जिसका नाम ‘गरिमा ‘रखा गया। यह भारत का पहला सफल क्लोन था और भैस का क्लोन बनाने वाला भारत पहला देश बन गया।

क्लोनिंग के फायदे Benefits of Cloning 

1 . कैंसर के उपचार में क्लोनिंग का विशेष महत्व है क्योकि कैंसर में कोशिकाएं विभाजित होने लगती है तथा कुछ कोशिकाएं तो पुनर्रचित हो जाती है क्लोनिंग के द्वारा इस कोशिकाओं की पुनः रचना की जा सकती है।

2 . क्लोनिंग के द्वारा विशेष प्रकार की वनस्पतियों और जीवों का क्लोन तैयार कर महत्वपूर्ण औषधियों का निर्माण किया जा सकता है। इससे जैवविविधता का भी संरक्षण किया जा सकता है।

3 .आण्विक क्लोनिंग की मदद से अनेक मानवपयोगी प्रोटीनों जैसे -इन्सुलिन आदि का निर्माण किया जा सकता है।

4 . क्लोनिंग की सहायता से विशेष ऊतकों व अंगों का निर्माण कर असाध्य व अनुवांशिक बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। जो परम्परागत चिकित्सा से ठीक नहीं किया जा सकता है।

क्लोनिंग के नुकसान Disadvantage of Cloning 

1 . मानव क्लोनिंग से अपराध बढ़ने की आशंका है जिस जीव की क्लोनिंग कॉपी तैयार की गयी है उसका दुरपयोग भी किया जा सकता है क्योकि क्लोनिंग से एक ही तरह के कई जीव या मनुष्यों को बनाया जा सकता है। जिसका प्रयोग क्लोन सैनिक तैयार कर धनी और विकसित देश इसका प्रयोग  साम्राजयवाद व वैश्विक आंतकवाद के रूप में कर सकते है।

2 . क्लोनिंग से बड़े पैमाने पर भ्रूण हत्या होगी क्योकि इसमें सफलता का प्रतिशत बहुत कम है इस प्रक्रिया में कई प्रकार की जेनेटिक समस्याएं भी उत्पन्न हो रही है जो हमारे लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।

3 . क्लोनिंग के आ जाने से मानव जीवन के महत्ता में कमी आएगी।

4 . इससे आने वाली भावी पीढ़ी प्रभावित होगी।

क्लोनिंग के नुकसानों को देखते हुए  ज्यादातर सभी देशों में बैन है।

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