शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान || शंखपुष्पी क्या है।

आजकल आयुर्वेद में बताई गयीं जड़ी बूटियों को आजमाने का ट्रेंड चल रहा है जब से कोरोना जैसी महामारी ने दस्तक दी है लोगो के मन में अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंताए बढ़ गयी है जिससे ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हो गए है तो कुछ लोग आयुर्वेद पर निर्भर हो गए है कहते है न की जब तक हम खुद किसी बड़ी परेशानी में नहीं घिरते तब तक हम एकदम बेफिक्र रहते है और जैसी ही कोई परेशानी होती है तो सभी तरह के नुस्खों को अपनाते है ऐसा ही हुआ है कोरोना में। कोरोना महामारी आने के बाद अब ज्यादातर लोग आयुर्वेद पर पूरी तरह से निर्भर हो गए है आज हम बात कर रहे है शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान  के बारे में हम आपको बता दे की शंखपुष्पी एक प्रकार का फूल है जिसके हमारे आयुर्वेद में कई प्रकार के फायदे बताये गए है।

-शंखपुष्पी क्या है

शंखपुष्पी एक प्रकार का फूल है जो शंख के आकर का होता है इसका आकर शंख जैसा होने के कारण इसे ज्यादातर लोग शंखपुष्पी कहते है। शंखपुष्पी फूल तीन प्रकार के होते है – सफेद ,लाल और नीले परन्तु हमारे आयुर्वेद में सफेद शंखपुष्पी फूल का प्रयोग अधिक होता है। शंखपुष्पी के फूल सर्दियों में अपने आप झड़ जाते है और बरसात में अपने आप खिलने लगते है।

शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान 

-शंखपुष्पी का पौधा

शंखपुष्पी का पौधा कैसा होता है-शंखपुष्पी का पौधा सूखी और पथरीली भूमि में पायी जाने वाली एक गुणकारी वनस्पति है कुछ जगहों में शंखपुष्पी के गुणों के कारण इसकी खेती भी की जाती है परन्तु यह अधिकतर जंगलो में अपने आप ही उग आती है।शंखपुष्पी का तना डेढ़ से दो फीट लम्बा व इसकी जड़ें एक से दो इंच उँगलियों की मोटाई की होती है शंखपुष्पी की पत्तियों को मसलने पर मूली जैसी गंध आती है।

-शंखपुष्पी के भिन्न भिन्न नाम

शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान की भांति शंखपुष्पी को अलग -अलग भाषाओ में शंखपुष्पी को अलग -अलग नामों से जाना जाता है किन्तु अधिकतर लोग शंख के आकर वाले फूलों के कारण इसे शंखपुष्पी ही कहते है। शंखपुष्पी हिंदी भाषा का शब्द है शंखपुष्पी का बॉटनिकल नाम कन्वॉल्वलुस प्लरिकालिस है इसके अलावा इसे सुपुष्पी ,मेध्या ,शङ्खपुष्पी ,विष्णुक्रांति ,शंखावली ,शंखपुष्पम आदि नामों से जानते है शंखपुष्पी को अंग्रेजी में वाइट ग्राउंड ग्लोरी कहते है।

-शंखपुष्पी के पोषक तत्व

शंखपुष्पी में एंथोसायनिन ,ट्राईपटेनोइड ,फ्लेवोनोल ग्लाइकोसाइड व स्टेराइड जैसे पोषक तत्व पाए जाते है जो हमारे मस्तिष्क के लिए बहुत लाभकारी होते है यही कारण है की इसे तंत्रिका टॉनिक कहते है।हमारे कुछ महान चिकित्स्कों ने शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से वर्णन किया है जिनको पढ़कर हम अपनी शारीरिक व मानसिक बीमारियों को ठीक कर सकते है। 

-शंखपुष्पी के फायदे

शंखपुष्पी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका प्रयोग कई प्रकार की गंभीर बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है ज्यादातर शंखपुष्पी का प्रयोग मस्तिष्क की बीमारियों को ठीक करने में किया जाता है जिस कारण हमारे आयुर्वेद में इसे तंत्रिका टॉनिक कहा जाता है मानसिक बीमारियों के साथ -साथ शंखपुष्पी का उपयोग कमजोरी ,डिप्रेशन ,हाई ब्लड प्रेशर व अल्जाइमर जैसी दुर्लभ बीमारियों को ठीक करने में किया जाता है। आइये जानते है शंखपुष्पी के कुछ महत्वपूर्ण फायदों के बारे में जो इस प्रकार है –

  • शंखपुष्पी का प्रयोग याददाश्त सुधारने में

शंखपुष्पी में एंथोसायनिन ,ट्राईपटेनोइड ,फ्लेवोनोल ग्लाइकोसाइड व स्टेराइड जैसे पोषक तत्व पाए पाये जाने के कारण ही शंखपुष्पी हमारी याददाश्त को ठीक कर स्मृति में सुधार लाती है इसके सेवन से हम अपनी याददाश्त में सुधार कर सकते है।

सेवन विधि – शंखपुष्पी के एक चम्मच चूर्ण को रोजाना सुबह शाम एक गिलास दूध के साथ पिये इससे आपकी याददाश्त में सुधार होगा।

  • शंखपुष्पी का प्रयोग सिरदर्द में

हम ऊपर आपको बता चुके है की शंखपुष्पी को तंत्रिका सिरप भी कहते है सिरदर्द में शंखपुष्पी रामबाण होती है सिरदर्द होने पर आप शंखपुष्पी सिरप का सेवन दो- दो चम्मच सुबह शाम करे।

  • शंखपुष्पी का प्रयोग तनाव में

तनाव एक ऐसी अवस्था है जिसमे बाहर से स्वस्थ्य दिखने वाला व्यक्ति अंदर से पूरी तरह टूटा हुआ होता है आज -कल के युवाओ में यह एक गंभीर कारण बन गया है जिसकी वजह से लोगों के सोचने समझने की क्षमता क्षीण हो जाती है व्यक्ति हर समय परेशान और बेचैन रहता है इससे निजात पाने के लिए आप शंखपुष्पी का नियमित सेवन करे। आप शंखपुष्पी की सिरप या इसका चूर्ण प्रयोग कर सकते है।

  • कमजोरी से राहत दिलाने में शंखपुष्पी का सेवन

यदि आप मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर महसूस कर रहे है तो आप शंखपुष्पी के एक चम्मच चूर्ण को रोजाना सुबह शाम खाने के बाद दूध के साथ पिए इससे आपकी कमजोरी जल्द दूर हो जाएगी।

  • एकाग्रता बढ़ाने में शंखपुष्पी के फायदे

शंखपुष्पी में नोट्रॉपिक औषधि यानी बुद्धि को एकाग्र व बढ़ाने के गुण होते है जिस कारण शंखपुष्पी का उपयोग लोग एकाग्रता हो बढ़ाने में करते है।वैसे तो शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान के बारे में हमारे आयुर्वेद में कई भेद बताये गए है जिनको प्रयोग करने हम अपनी एकाग्रता को बढ़ा सकते है। 

  • शंखपुष्पी से अनिद्रा में राहत

शंखपुष्पी में एंथोसायनिन ,ट्राईपटेनोइड ,फ्लेवोनोल ग्लाइकोसाइड व स्टेराइड जैसे पोषक तत्व पाए जाते है व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत व शांत बनाते है इसके नियमित सेवन से अनिद्रा जैसी अप्रिय बीमारियों से निजात पाया जा सकता है।

  • शंखपुष्पी से हाई ब्लड प्रेशर में राहत

शंखपुष्पी में अनिद्रा ,थकान ,तनाव ,अल्जाइमर ,कमजोरी जैसी बीमारियों को ठीक करने के गुण पाए जाते है इसका मतलब शंखपुष्पी अनगिनत लाभों से भरपूर है हम आपको बता दे की शंखपुष्पी के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है।

-शंखपुष्पी के नुकसान

  • आयुर्वेद के अनुसार अभी तक शंखपुष्पी के कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं मिले है शंखपुष्पी एक गुणकारी जड़ी बूटी है जिसके फायदे ही फायदे है परन्तु कुछ प्रकार के लोगो को इसका सेवन सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।क्योकि शंखपुष्पी एक जड़ी बूटी है और शंखपुष्पी के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते है। 
  • गर्भवती महिलाओ को शंखपुष्पी का सेवन नहीं करना चाहिए खासकर स्तनपान कराने वाली महिलाओं को तो बिना डॉक्टर की सलाह लिए इसका सेवन बिलकुल भी न करे क्योकि यह आपके लिए नुकसान दायक हो सकता है।
  • 3 वर्ष से कम शिशुओं को  शंखपुष्पी का सेवन न कराये यह इनके लिए नुकसानदेय हो सकता है।
  • कम ब्लड प्रेशर वाले मरीज को भी शंखपुष्पी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योकि शंखपुष्पी बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कम करता है और ऐसे में आपका ब्लड प्रेशर और भी कम हो सकता है जो आपके लिए अच्छा नहीं है।

-शंखपुष्पी की खुराक कैसे ले 

शंखपुष्पी बाजार में कई तरह से उपलब्ध होती है जैसे शंखपुष्पी अर्क ,शंखपुष्पी सिरप ,शंखपुष्पी चूर्ण व शंखपुष्पी कैप्सूल आदि इन सबका सेवन करने का अलग -अलग तरीका है जो इस प्रकार है –

  • शंखपुष्पी कैप्सूल -सुबह शाम एक -एक कैप्सूल 
  • शंखपुष्पी चूर्ण -दो से तीन ग्राम दिन में दो बार खाने के बाद  दूध या पानी के साथ ले। 
  • शंखपुष्पी सिरप -एक से दो चम्मच दिन में दो बार। 
  • शंखपुष्पी अर्क -शंखपुष्पी अर्क सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है इसका प्रयोग दिन में दो बार खाली पेट 200 से 250 ग्राम ले। 

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