जीन चिकित्सा क्या है || जानिये इसके फायदे और नुकसान

जीन चिकित्सा क्या है– यह जानने से पहले हमे यह जानना आवश्यक है की जीन क्या है आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दे की जीन डी एन ए (DNA ) के न्यूक्लियोटाइड का ऐसा अनुक्रम है जिसमे सन्निहित कूटबद्ध सूचनाओं से प्रोटीन के संश्लेषण का कार्य संम्पन्न होता है। जीन यूनानी भाषा के जीनस शब्द से बना है जीन अनुवांशिकता की मूलभूत इकाई है। जीन से ही निकलकर आया जीन चिकित्सा क्या है जो आज -कल काफी चर्चा में है जिसको जानना हमारे लिए बेहद जरूरी और दिलचस्प है आइये आपको बताते है की( advantages and disadvantages of gene therapy )जीन चिकित्सा क्या है –

जीन चिकित्सा क्या है ? What is gene therapy in Hindi ?

जीन चिकित्सा क्या है-जीन हमारी कोशिकाओं के अंदर पायें जाते है जो हम स्वस्थ्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है कोशिकाओं के अंदर किसी एक जीन का खराब होना भी हमे बुरी तरह बीमार कर सकता है हमारे शरीर में अनेकों बीमारियाँ ऐसी है जो या तो जीन की सरंचना में खराबी के कारण या फिर किसी एक जीन के अनुपस्थिति के कारण होती है यह पता लगाने के बाद की जीन की खराबी या अनुपस्थिति के कारण ही हमे अनेकों गंभीर बीमारियाँ हो जाती है वैज्ञानिकों ने जैव प्राद्यौगिकी की सहायता से जीन में बदलाव व प्रत्यारोपण करके बिमारियों का इलाज ढूंढ लिया है। इस प्रक्रिया को हम जीन चिकित्सा कहते है। वैज्ञानिकों द्वारा दशकों खोजबीन करने के बाद अब जाकर कहीं जीन चिकित्सा के लाभ देखने को मिल रहे है। जीन चिकित्सा को हम जीन एडिटिंग और जीन प्रत्यारोपण के नामों से भी जानते है।

साधारण शब्दों में कहे तो जीन के प्रत्यारोपण या जीन के एडिटिंग को ही हम जीन चिकित्सा कहते है।

कैसे की जाती है जीन चिकित्सा – Gene Therapy Process in Hindi 

ऊपर लेख में आपने जाना की जीन चिकित्सा क्या है अब हम आपको बताएंगे की जीन चिकित्सा कैसे की जाती है। हमारा शरीर अनगिनत कोशिकाओं का बना हुआ है जीन हमारे कोशिकाओं में मौजूद होते है जीन थेरेपी की परिकल्पना कोशिकाओं में उपस्थित जीन और उपयोगी प्रोटीन का निर्माण करने के लिए जेनेटिक द्रव्य को पहुंचाने के उददेश्य से किया गया। अगर कोई जीन खराब या दोषयुक्त हो जाता है तो उस जीन को  सुधार किया जाता है या उसके स्थान पर कोई स्वस्थ्य जीन प्रत्यारोपित कर  दिया जाता है इस प्रक्रिया को ही जीन चिकित्सा कहते है। इसमें अभी लगातार शोध किया जा रहा है ताकि इस प्रक्रिया को और भी लाभकारी बनाया जा सके।

जीन चिकित्सा के प्रकार – Types of Gene therapy in Hindi

जीन चिकित्सा के अंतर्गत मूलभूत तीन प्रकार की विधियाँ प्रयोग में लायी गयी है जो इस प्रकार है।

1 . जीन प्रतिस्थापन विधि (Gene Replacement )

विकृत अथवा दोषयुक्त जीन के स्थान पर स्वस्थ्य और विकृतहीन जीन के प्रतिस्थापन की प्रक्रिया को जीन प्रतिस्थापन (Gene Replacement ) कहते है।

2 . जीन सुधार (Gene Correction )

इस प्रक्रिया में जीन प्रतिस्थापन के बजाय जीन में आये आणविक खराबी में थोड़ा परिवर्तन कर जीन सुधार कर दिया जाता है। इसे हम जीन एडिटिंग भी कह सकते है।

3 . जीन आग्मेन्टेशन (Gene Augmentation )

इस प्रक्रिया में जीन के खरान होने पर जीन प्रतिस्थापन या जीन सुधार न करने विकृत जीन के साथ एक पूरी तरह से स्वस्थ्य और कार्यशील जीन को डाल दिया जाता है जो कोशिकाओं में स्वतंत्र रूप से कार्य करता है इस प्रक्रिया को जीन आग्मेन्टेशन (Gene Augmentation ) कहा जाता है।

जीन चिकित्सा भारत में – Gene Therapy in India 

जीन थेरेपी के मामले में भारत भी अब एशियाई देशों चीन ,जापान ,दक्षिण कोरिया की तरह विकास कर रहा है। भारत में जीन थेरेपी को बढ़ावा देने वाली रिसर्च को भारत सरकार काफी बढ़ावा दे रही है। भारत सरकार अपनी फंडिंग एजेंसियों के जरिये जैसे – “डिपार्टमेंट ऑफ़ बॉयो टेक्नोलॉजी” , “इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च ” के द्वारा जीन चिकित्सा में  रही रिसर्च को आर्थिक मदद कर उन्हें बढ़ावा दे रहा है।

जीन चिकित्सा के फायदे – Benefits of Gene Therapy in Hindi

माना की जीन थेरेपी हमारे लिए एक नई और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा है किन्तु इसके कई बड़े लाभ है जो किसी अन्य चिकित्सा में नहीं है जीन चिकित्सा के माध्यम से लगातार चली आ रही पीढ़ी दर पीढ़ी अनुवांशिक बीमारियों को जड़ से ठीक किया जा सकता है जो किसी भी थेरेपी या चिकित्सा से संभव नहीं है आइये जानते है जीन चिकित्सा के कुछ महत्वपूर्ण फायदे –advantages of gene therapy

  • जीन चिकित्सा से पीढ़ी दर पीढ़ी होने वाली अनुवांशिक बिमारियों को जड़ से ठीक किया जा सकता है।
  • जीन चिकित्सा से माइलाइड कोशिकाओं को प्रभावित करने वाले रोगों का उपचार किया जाता है।
  • जीन थेरेपी से हटिंगटन कोइया और पार्किंसन रोग का उपचार
  • जीन थेरेपी से सिस्टिक फाइब्रोसिस , थैलेसेमिया और कैंसर के कुछ प्रकारों का उपचार
  • जीन चिकित्सा से चुहिया में होने वाले सिकल सेल का सफलतापूर्वक उपचार किया जाता है।
  • जीन चिकित्सा से एससीआईडी ( सीवियर कंबाइंड इम्यूनो डिफिसिअन्सी या बबल ब्वॉय रोग ) का उपचार भी संभव है।
  • जीन चिकित्सा से किसी भी व्यक्ति में रोगों के लक्षण दिखने से पहले ही रोगथाम की जा सकती है।
  • जीन चिकित्सा जन्मित रोगों के उपचार की नयी विधियों का पता लगाने में भी उपयोगी है।

जीन चिकित्सा के नुकसान – Side effects of Gene Therapy in Hindi

जीन थेरेपी ले लाभों के साथ -साथ इसमें जोखिम भी होता है क्योकि किसी भी जीन को आसानी से सुधार या प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता है इसके लिए एक वेक्टर की जरूरत होती है ये वेक्टर एक प्रकार के वायरस होते है इन्ही के सहारे जीन को कोशिकाओं में पहुँचाया जाता है जो काफी जोखिम उत्पन्न करते है जो इस प्रकार है –

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता – जीन प्रत्यारोपण में डाले गए नए वायरस से हमारे शरीर में इन्फ़ेक्सन हो सकता है जिससे हमारे इम्यून सिस्टम  खतरा होता है।
  • जीन प्रत्यारोपण करते समय यदि जीन गलत जगह प्रत्यारोपित हो गया तो यह ट्यूमर का रूप ले लेता है जो हमारे लिए एक बड़ा खतरा है।
  • यह भी हो सकता है की जीन इंजेक्ट करने के बाद वायरस किसी अन्य कोशिका को नुकसान पहुचाये क्योकि एक वायरस कई कोशिकाओं को प्रभावित करता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
  • यह भी हो सकता है की जो वायरस शरीर में प्रत्यारोपित किया गया है वह बॉडी में जाकर फिर से संक्रमित हो जाए। यह काफी खतरनाक भी हो सकता है।
  • जीन चिकित्सा कराने वाले रोगियों और उसके भावी पीढ़ियों में जीन थेरेपी से होने वाले प्रभावो का दशकों तक ध्यान रखना पड़ेगा जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
  • चूँकि यह थेरेपी पूर्ण विकसित नहीं है इसलिए इसमें वैज्ञानिक अनिश्चियता व चिकित्सीय जोखिम का भी खतरा है।

जीन चिकित्सा से जुड़े नैतिक मुद्दे – Ethical Issues Related to Gene Therapy 

जीन चिकित्सा के शोधनुसार अभी तक इसके कई बड़े लाभ देखने को मिले है किन्तु जीन चिकित्सा से सम्बंधित कुछ नैतिक मुद्दे भी सामने आये है। ये मुद्दे कई आशंकाओं को समाहित किये हुए है जो हमे सोचने पर मजबूर करते है तो आइये जानते है जीन चिकित्सा से जुड़े नैतिक मुद्दे –

  • यदि अविकसित भ्रूण या बच्चों पर जीन थेरेपी का शोध किया जाता है तो पूर्वसूचना सहमति का प्रश्न सामने आता है जो की संभव नहीं है ऐसे में किसके सहमति की आवश्यकता होगी  ?
  • क्या हम आने वाली पीढ़ी की सहमति के बिना ही उनके अनुवांशिक लक्षणों में परिवर्तन कर सकते है  ?
  • क्या जीन चिकित्सा से होने वाले जोखिम में बीमा कम्पनियाँ इसका भुगतान करेगीं  ?
  • जीन थेरेपी लेते समय जब कोई व्यक्ति चिकित्सा ले मद्देनजर मानवीय अनुप्रयोग हेतु हस्ताक्षर करता है तो उससे पूर्वसूचनायुक्त सहमति लेना कितना अनिवार्य है की किसे सामान्य माना जाता है और किसे अयोग्यतापूर्ण माना जाता है। सामान्य का निर्धारण कौन करता है ?

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