डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है तथा इसके उपयोग

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है – किसी भी व्यक्ति की अनुवांशिक रूप से पहचान करना ही डीएनए फिंगरप्रिंटिंग या डीएनए प्रोफाइलिंग कहलाता है। डीएनए प्रत्येक व्यक्ति के कोशिका में पाया जाने वाला एक अनुवांशिक पदार्थ है जिसकी सहायता से किसी भी व्यक्ति के माता -पिता का पता लगाया जा सकता है। डीएनए से ही पता चलता है की आप किसके वंशज हो। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एक जैविक तकनीक है जिसमे व्यक्ति के विभिन्न अवयवों जैसे – लार ,बाल ,रुधिर, वीर्य या अन्य अनुवांशिक स्रोतों के माध्यम से व्यक्ति के डीएनए का पता लगाया जा सकता है। आज के बदलते दौर में डीएनए के बारे में तो सभी लोगों ने सुना ही होगा किन्तु डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है यह सभी लोग नहीं जानते है इस लिख के माध्यम से हम आपको डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है तथा इसके उपयोगों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। पूरी जानकारी के लिए लेख को पूरा पढ़े और अंत में कमेंट में जरूर बताये की ये जानकारी आपको कैसी लगी।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है ?

डीएनए एक आधुनिक तकनीक है जिसके माध्यम से किसी भी व्यक्ति के माता -पिता व उसके अनुवांशिक लक्षणों का पता लगाया जा सकता है। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है यह जानने से पहले आपको यह जानना बहुत जरूरी है की डीएनए क्या है ? डीएनए मनुष्यों के कोशिका में स्थित एक अनुवांशिक पदार्थ है। यह प्रकट व्यक्ति की कोशिका में पाया जाता है। किन्तु प्रत्येक व्यक्ति का डीएनए फिंगरप्रिंट अलग -अलग होता है।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की खोज 

वर्ष 1984 में ब्रिटिश लीसेस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक सर एलेक जेफ़्रेज़ द्वारा डीएनए फिंगरप्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का विकास किया गया था। किन्तु भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक लालजी सिंह को माना जाता है। डीएनए फिंगरप्रिंटिग के माध्यम से प्रवासन से लेकर पितृत्व का पता लगाया जा सकता है किन्तु डीएनए फिंगरप्रिंटिग के आने से सबसे ज्यादा फायदा अपराधियों को पकड़ने के लिए किया जाता है।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की प्रक्रिया 

 

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है 

यह तो सभी को पता है की डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है। किन्तु डीएनए फिगरप्रिंटिग कैसे की जाती है और कैसे इससे किसी भी व्यक्ति या अपराधी का पता लगाया जा सकता है। इससे के बारे में यदि आप नहीं जानते है तो तक अंत बने रहे इस लेख में। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग सामान्यतः इस आधार पर कार्य करती है की प्रत्येक मनुष्य में पायी जाने वाली डीएनए पुनरावृत्ति एक सामान नहीं होती है ,अर्थात प्रत्येक व्यक्ति के डीएनए का प्रतिरूप भिन्न -भिन्न व अद्वितीय होता है। हालाँकि सभी मनुष्यों के डीएनए  99.9 % तक सामान ही होते है किन्तु फिर भी कोशिकाओं में मौजूद कुछ डीएनए अलग और अद्वितीय होते है जिनके आधार पर ही किसी भी व्यक्ति के अनुवांशिकता का पता लगाया जा सकता है।

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जाने डीएनए फिगरप्रिंटिंग से अपराधी का पता कैसे चलता है ?

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग करने की बहुत सी विधियाँ है किन्तु हम हम आपको सबसे प्रचलित विधि बतायेगे। इस विधि में पहचान करने के लिए दो नमूने लिए जाते है एक विवादित बच्चे अथवा संदिग्ध व्यक्ति का और दूसरा उसके माता -पिता या किसी नजदीकी सम्बन्धी (रक्त सम्बन्धी ) का। आपको बता दे की केवल श्वेत रक्त कोशिकाओं में ही डीएनए पाया जाता है लाल रक्त कोशिकाओं में नहीं।

  • यह प्रक्रिया ब्लड या सेल सैंपल से शुरू होती है जिससे डीएनए कलेक्ट किया जाता है। फिर एक रेस्ट्रिक्शन एंजाइम का उपयोग करके डीएनए को दो टुकड़ों में काटा जाता है। फिर डीएनए के कटे हुए टुकड़ों को इलेक्ट्रोफोरेसिस विधि द्वारा जेल की मदद से बैंड्स के रूप में अलग किया जाता है।
  • डीएनए बैंड्स पैटर्न को नायलॉन झिल्ली पर स्थानांतरण किया जाता है।
  • रेडियोऐक्टिक डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू होती है। यह जांच प्रक्रिया नायलॉन झिल्ली पर विशिष्ट डीएनए को क्रम में बांधती है।
  • अतिरिक्त जांच सामग्री को अलग करने के बाद विशिष्ट डीएनए बंद पैटर्न प्राप्त किया जाता है।
  • रेडियोएक्टिव डीएनए पैटर्न को एक्सरे फिल्म पर डालकर खुला छोड़ दिया जाता है इससे विकसित हुआ पैटर्न ही डीएनए फिगरप्रिंटिग होता है।

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डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक के उपयोग 

हर तकनीक का आविष्कार लोगों के हितों के लिए ही किया जाता है उन्हीं में से एक है डीएनए फिंगरप्रिंटिग। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग क्या है यह तो आप जान ही गए है अब इसके उपयोगों के बारे में जानेगे –

  • डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग किसी भी व्यक्ति का असली माता -पिता का पता लगाने में किया जाता है।
  • इस तकनीक के माध्यम से पैतृक सम्बन्धी विवादों को आसानी से हल किया जाता है।
  • डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के माध्यम से आनुवंशिक बिमारियों का पता लगाकर उन्हें ठीक किया जा सकता है।
  • इस मशहूर तकनीक के माध्यम से किसी भी अपराधी जैसे -रेपिस्ट या हत्यारे का सही पता लगाया जा सकता है।
  • दुर्घटना के दौरान शवों का पता लगाने के लिए डीएनए फिंगरप्रिंटिग तकनीक का प्रयोग किया है।
  • डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के माध्यम से विश्व में फैली प्रजातियों के भौगोलिक विवरण का पता लगाया जा सकता है।

डीएनए फिंगरप्रिंटिग की सीमाएँ 

कोई भी तकनीक कितनी भी उपयोगी हो किन्तु उसकी सीमाएं जरूर होती है इसी प्रकार डीएनए फिंगरप्रिटिंग तकनीक में एक मुख्य समस्या यह है की इसके द्वारा लिए गए नमूने आसानी से नष्ट हो सकते है। जेनेटिक जंक के सूक्ष्मतम कण डीएनए नमूनों को संक्रमित कर उन्हें नष्ट कर देते है। हालाँकि डीएनए फिंगरप्रिंटिंग को कार्य करने के लिए एक उपयुक्त नमूने की आवश्यकता होती ही है ,फिर भी पीसीआर (पॉलीमर्स चेन रिएक्शन ) नमक एक नई तकनीक के उपयोग से इस समस्या का हल निकला जा सकता है। पीसीआर डीएनए के बेहद सूक्ष्म नमूनों का इस्तेमाल कर सकता है और त्वरित परिणाम दे सकता है। किन्तु पीसीआर द्वारा उपयोग किये गए डीएनए नमूने भी अपने आकार के कण संक्रमित हो सकते है क्योकि संक्रमणविहीन छोटे नमूने प्राप्त होना बहुत मुश्किल होता है।

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